गुरुवार, 3 सितंबर 2026

जे.एफ.एम.एल.टी इंडिया नेशनल एसोसिएशन का प्रयास सफल :यूजीसी ने धारा 22 में किया संशोधन: नेशनल कमीशन द्वारा अनुशंसित अलाइड और हेल्थकेयर डिग्रियों को मिली आधिकारिक मान्यता :

 यूजीसी ने देश में एलाइज और हेल्थकेयर शिक्षा को बेहतर बनाने और इसमें समानता लाने के लिए नए 33 एलाइड कोर्स को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कई प्रोग्राम के नामों में बदलाव किया गया है तो वहीं कई कोर्स की अवधि में बदलाव हुआ है।


नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने यूजीसी अधिनियम, 1956 की धारा 22(3) के तहत अपनी पांचवीं संशोधन अधिसूचना (संख्या F.21-12/2026(CPP-II)) जारी करते हुए एक बड़ा नियामक निर्णय लिया है। इस गजट अधिसूचना के माध्यम से देश भर के विश्वविद्यालयों के लिए अलाइड एवं हेल्थकेयर क्षेत्रों के डिग्री नामों को मानकीकृत और आधिकारिक सूची में शामिल कर दिया गया है।

यह ऐतिहासिक संशोधन नेशनल कमीशन फॉर अलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफ़ेशन्स के अंतर्गत आने वाली डिग्रियों के नामों में लंबे समय से चली रही विसंगतियों को दूर करता है। जॉइंट फोरम ऑफ मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट्स (जे एफ एम एल टी इंडिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापनों और निरंतर प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने इन महत्वपूर्ण डिग्रियों को धारा 22 के आधिकारिक ढांचे में शामिल करने की मंजूरी दी है।

यूजीसी नियमों के अनुसार, विश्वविद्यालय केवल उन्हीं डिग्री नामों के तहत उपाधि दे सकते हैं जो यूजीसी अधिनियम की धारा 22 में सूचीबद्ध हों। इससे पहले बी.एम.एल.एस,बी.एस , और एम एम एल एस जैसी कई महत्वपूर्ण डिग्रियां इस सूची में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं थीं।

इस फैसले पर खुशी व्यक्त करते हुए डॉ. संतोष कुमार ने कहा, "डिग्री नामों का मानकीकरण देश भर के मेडिकल लैबोरेटरी और अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के अकादमिक भविष्य, आधिकारिक पंजीकरण और पेशेवर पहचान की रक्षा के लिए बेहद जरूरी था। इस फैसले से पूरे देश में एक समान मानक लागू होंगे और छात्रों के करियर में रही प्रशासनिक बाधाएं समाप्त होंगी।"

'एक देश, एक करिकुलम' का लक्ष्य और 17 विषय

 

गजट अधिसूचना की मुख्य बातें:

·        मेडिकल लैबोरेटरी साइंसेज: 4-वर्षीय बैचलर ऑफ मेडिकल लैबोरेटरी साइंस) और 2-वर्षीय मास्टर ऑफ मेडिकल लैबोरेटरी साइंस - मेडिकल बायोकैमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, हेमेटोलॉजी, हिस्टोलॉजी आदि में विशेषज्ञता) को आधिकारिक मान्यता।

·        रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग साइंसेज: रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी,(रेडिएशन थेरेपी टेक्नोलॉजी) और एमआरआई/सीटी में विशेषज्ञता वाले  पाठ्यक्रमों का औपचारिक समावेश।

·        ऑप्टोमेट्री और थेरेपी प्रोग्राम: ऑप्टोमेट्री),ऑक्यूपेशनल थेरेपी और फिजियोथेरेपी) पाठ्यक्रमों की अवधि को मानकीकृत कर 5 वर्ष किया गया।

·        अन्य अलाइड हेल्थ स्ट्रीम्स: इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी एनेस्थीसिया एंड ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी ,डायलिसिस थेरेपी, रेस्पिरेटरी टेक्नोलॉजी, फिजिशियन असोसिएट और हेल्थ इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट के लिए 4-वर्षीय स्नातक 2-वर्षीय स्नातकोत्तर डिग्री नामों को अंतिम रूप दिया गया।

यूजीसी ने निर्देश दिया है कि जो विश्वविद्यालय वर्तमान में इन पाठ्यक्रमों को गैर-मानक नामों से चला रहे हैं, वे तत्काल प्रभाव से अपने पाठ्यक्रमों और डिग्रियों के नाम इस नई अधिसूचना के अनुसार संशोधित करें।

एग्जीक्यूशन और राज्य स्तर पर चुनौतियां

इस जनरलाइजेशन को साल 2026-27 के अकादमिक सत्र से पूरे देश में लागू करने की योजना है। हालांकि इसे करना इतना आसान भी नहीं है, क्योंकि इसके तहत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक अनिवार्य 'स्टेट एलाइड एंड हेल्थकेयर काउंसिल' (SAHC) का गठन नहीं किया है। इतना ही नहीं कुछ राज्यों में बनाई गई काउंसिल्स 'NCAHP एक्ट' के प्रावधानों के पूरी तरह अनुरूप नहीं हैं, जिससे जमीनी स्तर पर इन सुधारों को पूरी तरह लागू करने में बाधा रही है। इसके बावजूद, यूजीसी का यह कदम भारतीय हेल्थकेयर शिक्षा को वैश्विक मानकों के समकक्ष खड़ा करने और छात्रों के लिए डिग्रियों की विश्वसनीयता बढ़ाने में बेहद कारगर साबित होगा।

 


जे.एफ.एम.एल.टी इंडिया नेशनल एसोसिएशन का प्रयास सफल :यूजीसी ने धारा 22 में किया संशोधन: नेशनल कमीशन द्वारा अनुशंसित अलाइड और हेल्थकेयर डिग्रियों को मिली आधिकारिक मान्यता :

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