शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

AIIMS पटना के Allied Health Sciences छात्रों को इंटर्नशिप के दौरान ₹10,250 मासिक स्टाइपेंड

 AIIMS पटना का बड़ा फैसला, पात्र छात्रों को इंटर्नशिप अवधि में मिलेगा आर्थिक प्रोत्साहन

पटना, 11 सितंबर 2026
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), पटना ने Allied Health Sciences Courses के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। AIIMS पटना के सक्षम प्राधिकारी ने इंटर्नशिप की अवधि के दौरान पात्र Allied Health Sciences विद्यार्थियों को ₹10,250 प्रति माह स्टाइपेंड प्रदान करने की स्वीकृति दी है।

AIIMS पटना के 9 सितंबर 2026 को जारी कार्यालय आदेश के अनुसार यह निर्णय Standing Finance Committee (SFC), AIIMS पटना की बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर अनुमोदित किया गया है। आदेश में बताया गया है कि SFC Agenda No. SFC 09/07/2026 के संबंध में सक्षम प्राधिकारी द्वारा Allied Health Sciences Courses में अध्ययनरत विद्यार्थियों को इंटर्नशिप अवधि के दौरान ₹10,250 प्रतिमाह स्टाइपेंड देने की मंजूरी प्रदान की गई है।

आदेश के अनुसार, यह स्टाइपेंड पात्र विद्यार्थियों को लागू नियमों एवं विनियमों के अधीन इंटर्नशिप की अवधि के दौरान देय होगा।

Allied Health विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण पहल

AIIMS पटना का यह निर्णय Allied Health Sciences के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण पर बेहतर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे Allied Health Sciences के क्षेत्र में कौशल आधारित शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

यह निर्णय विशेष रूप से Medical Laboratory Technology सहित विभिन्न Allied Health Sciences पाठ्यक्रमों से जुड़े विद्यार्थियों के लिए चर्चा का विषय बन गया है।

गुरुवार, 10 सितंबर 2026

भोपाल में बेसिक मेडिकल लैबोरेटरी की गुणवत्ता बढ़ाने की पहल, एनएबीएल प्रमाणन एवं प्राथमिकता को मिलेगा बढ़ावा:

मध्यप्रदेश में बेसिक मेडिकल लैबोरेटरी की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एनएबीएल(NABL)  प्रमाणन की मान्यता प्रदान की जाएगी

 भोपाल

ज्वाइंट फोरम ऑफ मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन इंडिया,मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन मध्यप्रदेश,विज्ञान भारती एवं क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के तत्वाधान में  एन ए बी एल प्रमाणन सर्टिफिकेशन के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया 

जिसमें  एनएबीएल (NABL) के उपनिदेशक श्री चंद्रकांत सोलंकी एवं क्वालिटी काउंसिल इंडिया (QCI) के कॉर्डिनेटर मिस ऐश्वर्या नायर के द्वारा बेसिक मेडिकल लैबोरेटरी जो कि मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट के द्वारा संचालित की जाती है इन सभी लैब्स को एंट्री लेवल मेडिकल टेस्टिंग लब  का  प्रमाणन एवं सर्टिफिकेशन के संबंध में जानकारी प्रदान किया गया

इस एक दिवसीय वर्कशॉप के भोपाल के बेसिक मेडिकल लैबोरेटरी संचालक एवं मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट शामिल हुए

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में  अपनी  एम्प्री सीएसआईआर - के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ सत्यानन्द मिश्रा ने सेसंर और बायोसेंसर कि मेडिकल लेबोरेटरी के क्षेत्र में महत्वत्ता के बारे में जानकारी प्रदान की

कार्यक्रम की अध्यक्षता के रहे जे एफ एम एल टी इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संतोष कुमार यादव ने कहा कि क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के तहत मध्यप्रदेश की सभी बेसिक मेडिकल लैबोरेटरी को एन ए बी एल का एंट्री लेवल टेस्टिंग का प्रमाणन एवं सर्टिफिकेशन प्रदान किया जाएगा ताकि लैब्स की रिपोर्ट गुणवत्ता के साथ मरीजो को प्रदान किया जाए

विशिष्ट अतिथि के रूप में सुनील कुमार साहू प्रदेश सह मीडिया प्रभारी बी जे पी पिछड़ा वर्ग ने कहा कि मरीजों के रोग निदान के मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट एवं।लैब्स का बहुत योगदान होता है मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट को लब सच्चालन सहित हस्ताक्षर का अधिकार मिलना चाहिए और नियम बनाए जाना चाहिए इस संबंध में सरकार से पत्राचार किया जाएगा और यथावत सहयोग किया जाएगा

चेयरमैन डॉ दीपक श्रीवास्तव ने बेसिक लैब्स के लिए क्वालिटी कंट्रोल एवं असेसमेंट बहुत जरूरी है ओर सभी लैब्स को एन ए बी एल की कैटेगरी में आना ही चाहिए

कमलेश राठौर प्रदेश अध्यक्ष मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने  कहा कि कलेक्शन सेंटर के सच्चालन के लिए गाइड लाइन बनाया जाना चाहिए और इन कलेक्शन सेंटर के लिए भी क्वालिटी मेंटेन करना जरूरी है

प्रदेश महासचिव हेमराज ने मंच का संचालन किया साथ ही  प्रदेश कोषाध्यक्ष आशीष बड़ौद ने जिला अध्यक्ष पवन वर्मा , दीपक जाटव, राकेश अहिरवार एवं अनूप शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया

गुरुवार, 3 सितंबर 2026

जे.एफ.एम.एल.टी इंडिया नेशनल एसोसिएशन का प्रयास सफल :यूजीसी ने धारा 22 में किया संशोधन: नेशनल कमीशन द्वारा अनुशंसित अलाइड और हेल्थकेयर डिग्रियों को मिली आधिकारिक मान्यता :

 यूजीसी ने देश में एलाइज और हेल्थकेयर शिक्षा को बेहतर बनाने और इसमें समानता लाने के लिए नए 33 एलाइड कोर्स को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कई प्रोग्राम के नामों में बदलाव किया गया है तो वहीं कई कोर्स की अवधि में बदलाव हुआ है।


नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने यूजीसी अधिनियम, 1956 की धारा 22(3) के तहत अपनी पांचवीं संशोधन अधिसूचना (संख्या F.21-12/2026(CPP-II)) जारी करते हुए एक बड़ा नियामक निर्णय लिया है। इस गजट अधिसूचना के माध्यम से देश भर के विश्वविद्यालयों के लिए अलाइड एवं हेल्थकेयर क्षेत्रों के डिग्री नामों को मानकीकृत और आधिकारिक सूची में शामिल कर दिया गया है।

यह ऐतिहासिक संशोधन नेशनल कमीशन फॉर अलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफ़ेशन्स के अंतर्गत आने वाली डिग्रियों के नामों में लंबे समय से चली आ रही विसंगतियों को दूर करता है। जॉइंट फोरम ऑफ मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट्स (जे एफ एम एल टी इंडिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापनों और निरंतर प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने इन महत्वपूर्ण डिग्रियों को धारा 22 के आधिकारिक ढांचे में शामिल करने की मंजूरी दी है।

यूजीसी नियमों के अनुसार, विश्वविद्यालय केवल उन्हीं डिग्री नामों के तहत उपाधि दे सकते हैं जो यूजीसी अधिनियम की धारा 22 में सूचीबद्ध हों। इससे पहले बी.एम.एल.एस,बी.एस , और एम एम एल एस जैसी कई महत्वपूर्ण डिग्रियां इस सूची में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं थीं।

इस फैसले पर खुशी व्यक्त करते हुए डॉ. संतोष कुमार ने कहा, "डिग्री नामों का मानकीकरण देश भर के मेडिकल लैबोरेटरी और अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के अकादमिक भविष्य, आधिकारिक पंजीकरण और पेशेवर पहचान की रक्षा के लिए बेहद जरूरी था। इस फैसले से पूरे देश में एक समान मानक लागू होंगे और छात्रों के करियर में आ रही प्रशासनिक बाधाएं समाप्त होंगी।"

'एक देश, एक करिकुलम' का लक्ष्य और 17 विषय

 

गजट अधिसूचना की मुख्य बातें:

·        मेडिकल लैबोरेटरी साइंसेज: 4-वर्षीय बैचलर ऑफ मेडिकल लैबोरेटरी साइंस) और 2-वर्षीय मास्टर ऑफ मेडिकल लैबोरेटरी साइंस - मेडिकल बायोकैमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, हेमेटोलॉजी, हिस्टोलॉजी आदि में विशेषज्ञता) को आधिकारिक मान्यता।

·        रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग साइंसेज: रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी,(रेडिएशन थेरेपी टेक्नोलॉजी) और एमआरआई/सीटी में विशेषज्ञता वाले  पाठ्यक्रमों का औपचारिक समावेश।

·        ऑप्टोमेट्री और थेरेपी प्रोग्राम: ऑप्टोमेट्री),ऑक्यूपेशनल थेरेपी और फिजियोथेरेपी) पाठ्यक्रमों की अवधि को मानकीकृत कर 5 वर्ष किया गया।

·        अन्य अलाइड हेल्थ स्ट्रीम्स: इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी एनेस्थीसिया एंड ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी ,डायलिसिस थेरेपी, रेस्पिरेटरी टेक्नोलॉजी, फिजिशियन असोसिएट और हेल्थ इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट के लिए 4-वर्षीय स्नातक व 2-वर्षीय स्नातकोत्तर डिग्री नामों को अंतिम रूप दिया गया।

यूजीसी ने निर्देश दिया है कि जो विश्वविद्यालय वर्तमान में इन पाठ्यक्रमों को गैर-मानक नामों से चला रहे हैं, वे तत्काल प्रभाव से अपने पाठ्यक्रमों और डिग्रियों के नाम इस नई अधिसूचना के अनुसार संशोधित करें।

एग्जीक्यूशन और राज्य स्तर पर चुनौतियां

इस जनरलाइजेशन को साल 2026-27 के अकादमिक सत्र से पूरे देश में लागू करने की योजना है। हालांकि इसे करना इतना आसान भी नहीं है, क्योंकि इसके तहत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक अनिवार्य 'स्टेट एलाइड एंड हेल्थकेयर काउंसिल' (SAHC) का गठन नहीं किया है। इतना ही नहीं कुछ राज्यों में बनाई गई काउंसिल्स 'NCAHP एक्ट' के प्रावधानों के पूरी तरह अनुरूप नहीं हैं, जिससे जमीनी स्तर पर इन सुधारों को पूरी तरह लागू करने में बाधा आ रही है। इसके बावजूद, यूजीसी का यह कदम भारतीय हेल्थकेयर शिक्षा को वैश्विक मानकों के समकक्ष खड़ा करने और छात्रों के लिए डिग्रियों की विश्वसनीयता बढ़ाने में बेहद कारगर साबित होगा।

 


AIIMS पटना के Allied Health Sciences छात्रों को इंटर्नशिप के दौरान ₹10,250 मासिक स्टाइपेंड

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