शुक्रवार, 12 जून 2026

बिना योग्य मेडिकल लेबोरेटरी प्रोफेशनल्स के संचालित लैबों पर हो कार्रवाई, मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि: जे एफ एम एल टी इंडिया

 बिना डिग्रीधारी अथवा डिप्लोमाधारी योग्य कार्मिकों के मेडिकल लेबोरेटरी का संचालन गलत; प्रदेशों के स्वास्थ्य विभाग करें सख्त कार्रवाई : JFMLT India

नई दिल्ली।

ज्वाइंट फोरम ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट इंडिया (JFMLT India) ने देश के सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों से मांग की है कि बिना मान्यता प्राप्त डिग्री अथवा डिप्लोमा प्राप्त मेडिकल लेबोरेटरी प्रोफेशनल्स के संचालित हो रही मेडिकल डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी एवं पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

JFMLT India के अनुसार मेडिकल लेबोरेटरी साइंस स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण आधार है, जहां जांच रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक रोग का निदान एवं उपचार निर्धारित करते हैं। ऐसे में यदि प्रयोगशालाओं का संचालन योग्य एवं प्रशिक्षित मेडिकल लेबोरेटरी प्रोफेशनल्स के बिना किया जाता है तो गलत जांच रिपोर्ट, गलत निदान तथा मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

संगठन ने कहा कि देश के अनेक राज्यों में आज भी ऐसी प्रयोगशालाएं संचालित हो रही हैं, जहां आवश्यक शैक्षणिक योग्यता एवं तकनीकी दक्षता रखने वाले मेडिकल लेबोरेटरी प्रोफेशनल्स उपलब्ध नहीं हैं। यह स्थिति मरीजों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के लिए गंभीर चुनौती है।

JFMLT India ने सभी राज्य सरकारों एवं स्वास्थ्य विभागों से मांग की है कि—

• राज्यभर में संचालित मेडिकल लेबोरेटरी एवं डायग्नोस्टिक सेंटरों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाया जाए।
• योग्य डिग्रीधारी एवं डिप्लोमाधारी मेडिकल लेबोरेटरी प्रोफेशनल्स की उपलब्धता का सत्यापन किया जाए।
• नियमों का उल्लंघन करने वाली प्रयोगशालाओं के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
• राष्ट्रीय आयोग फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन्स (NCAHP) के मानकों एवं दिशानिर्देशों का पालन कराया जाए।
• आम जनता को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय प्रयोगशाला सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।

JFMLT India का मानना है कि देश में मेडिकल लेबोरेटरी सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने तथा मरीजों के हितों की रक्षा के लिए केवल योग्य एवं प्रशिक्षित मेडिकल लेबोरेटरी प्रोफेशनल्स द्वारा ही प्रयोगशालाओं का संचालन एवं तकनीकी कार्य किया जाना चाहिए।

मेडिकल लेबोरेटरी साइंस के क्षेत्र में योग्य शिक्षकों की भर्ती न होना एवं NCAHP दिशानिर्देशों का पालन न होना : एक गंभीर चुनौती

 

मेडिकल लेबोरेटरी साइंस के क्षेत्र में योग्य शिक्षकों की भर्ती न होना एवं NCAHP दिशानिर्देशों का पालन न होना : एक गंभीर चुनौती

मेडिकल लेबोरेटरी साइंस (Medical Laboratory Science) स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। रोगों के निदान, उपचार की निगरानी एवं स्वास्थ्य प्रबंधन में मेडिकल लेबोरेटरी प्रोफेशनल्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। भारत में इस क्षेत्र को विनियमित करने के लिए National Commission for Allied and Healthcare Professions (NCAHP) द्वारा मानक एवं दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं। इसके बावजूद अनेक मेडिकल कॉलेजों, विश्वविद्यालयों एवं प्रशिक्षण संस्थानों में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति न होना तथा NCAHP के मानकों का पालन न करना एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

प्रमुख चुनौतियाँ

1. योग्य शिक्षकों की कमी

कई संस्थानों में मेडिकल लेबोरेटरी साइंस विषयों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव रखने वाले शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जाती। इसके स्थान पर अन्य विषयों के शिक्षकों से अध्यापन कार्य कराया जाता है, जिससे छात्रों को विषय की गहन एवं व्यावहारिक जानकारी प्राप्त नहीं हो पाती।

2. NCAHP दिशानिर्देशों की अनदेखी

NCAHP द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम, शिक्षक-छात्र अनुपात, प्रयोगशाला सुविधाओं तथा क्लिनिकल प्रशिक्षण मानकों का कई संस्थानों में पूर्ण पालन नहीं किया जा रहा है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है और छात्रों का व्यावसायिक विकास बाधित होता है।

3. कौशल आधारित शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव

मेडिकल लेबोरेटरी साइंस एक कौशल-आधारित (Skill-Based) प्रोफेशन है। योग्य फैकल्टी एवं आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं के अभाव में विद्यार्थियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण कमजोर रह जाता है, जिससे उनकी रोजगार क्षमता प्रभावित होती है।

4. रोगी सुरक्षा पर प्रभाव

अपर्याप्त प्रशिक्षण प्राप्त पेशेवरों द्वारा किए गए परीक्षणों में त्रुटियों की संभावना बढ़ जाती है। इससे रोगों के निदान एवं उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जो अंततः रोगी सुरक्षा के लिए चुनौती बनता है।

संभावित समाधान

NCAHP मानकों का अनिवार्य अनुपालन

सभी विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों एवं प्रशिक्षण संस्थानों को NCAHP के मानकों और दिशानिर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करना चाहिए।

योग्य शिक्षकों की नियमित भर्ती

संस्थानों में मेडिकल लेबोरेटरी साइंस विषय में निर्धारित योग्यता एवं अनुभव रखने वाले शिक्षकों की पारदर्शी भर्ती सुनिश्चित की जानी चाहिए।

नियमित निरीक्षण एवं मूल्यांकन

संबंधित नियामक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया जाए कि संस्थान निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं।

उद्योग एवं अस्पतालों से समन्वय

शैक्षणिक संस्थानों को अस्पतालों एवं डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाओं के साथ सहयोग बढ़ाकर छात्रों को गुणवत्तापूर्ण क्लिनिकल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना चाहिए।

फैकल्टी विकास कार्यक्रम

शिक्षकों के लिए निरंतर प्रशिक्षण, रिसर्च एवं कौशल उन्नयन कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए ताकि वे नवीनतम तकनीकों एवं मानकों से अपडेट रहें।

मेडिकल लेबोरेटरी साइंस शिक्षा की गुणवत्ता सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ी हुई है। योग्य शिक्षकों की भर्ती न होना तथा NCAHP दिशानिर्देशों की अनदेखी न केवल विद्यार्थियों के भविष्य बल्कि रोगी सुरक्षा और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती है। इसलिए आवश्यक है कि सभी विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज एवं प्रशिक्षण संस्थान NCAHP मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें और योग्य फैकल्टी की नियुक्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

शनिवार, 6 जून 2026

सीआरपी टेस्ट से दीपिका कक्कड़ के ट्यूमर का पता कैसे चला?पढ़ना, समझना जरूरी है,बिजनेस ना बनाये

कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के आकस्मिक निष्कर्ष कभी-कभी गंभीर बीमारियों का शीघ्र पता लगाने में सहायक हो सकते हैं।

टीवी अभिनेत्री दीपिका कक्कड़ ने एक इंटरव्यू में बताया कि पित्ताशय के दर्द के लिए किए गए एक सामान्य मेडिकल चेकअप से एक बड़े ट्यूमर का पता चला। भारती सिंह और हर्ष लिम्बाचिया से बात करते हुए उन्होंने पित्त की पथरी से संबंधित दर्द होने के बाद सीआरपी टेस्ट करवाने की बात याद की।

हालांकि सूजन का स्तर मामूली रूप से बढ़ा हुआ था, लेकिन आगे की जांच से लगभग 8.5-9 सेंटीमीटर के ट्यूमर का पता चला।

मुझे पित्ताशय में दर्द हुआ था...डॉक्टर ने मुझे सीआरपी टेस्ट दिया...यह आपके शरीर में संक्रमण दर का पता लगाता है, वो मैंने कराया, वो थोड़ा ज्यादा आया,ऐसा नहीं है कि बहुत हाई आया, जितना मेरा ट्यूमर एग्रेसिव था, उतना हाई नहीं आया वो...उसमें पता चला कि गॉल ब्लैडर में तो स्टोन है ही, पर यहां ट्यूमर है..और वो भी पहला स्कैन में था 8.5-9 सेमी का ट्यूमर...इसलीए जब अनहोन निकला,तोह अनहोनी साइड से एक्स्ट्रा स्पेस रख के 11 सेमी का पूरा एक टुकड़ा निकला,” उसने पॉडकास्ट पर खुलासा किया।

अंततः ट्यूमर को आसपास के ऊतकों के एक हिस्से के साथ हटा दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 11 सेंटीमीटर का एक हिस्सा शल्य चिकित्सा द्वारा हटा दिया गया।

उनके अनुभव से यह बात उजागर होती है कि गंभीर बीमारियों का पता कभी-कभी तब चलता है जब डॉक्टर देखने में असंबंधित लगने वाले लक्षणों की जांच करते हैं।

पीएसआरआई अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार हेमेटोलॉजिस्ट और ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अमित उपाध्याय के अनुसार, इस तरह के निष्कर्ष असामान्य नहीं हैं।असंबंधित शिकायतों की जांच के दौरान संयोगवश ट्यूमर सहित गंभीर स्थितियों का पता चलना असामान्य नहीं है।

डॉ. उपाध्याय बताते हैं, "पेट के कई ट्यूमर, विशेष रूप से यकृत, अग्न्याशय, गुर्दे, पित्ताशय या आसपास के ऊतकों में उत्पन्न होने वाले ट्यूमर, अपने प्रारंभिक चरणों में लक्षणहीन रह सकते हैं।"

डॉ. उपाध्याय आगे कहते हैं, "मरीजों को अक्सर पेट में बेचैनी, सूजन, अपच, थकान या दर्द जैसे अस्पष्ट लक्षण महसूस होते हैं जो तुरंत कैंसर का संकेत नहीं देते। इन लक्षणों को अक्सर 'इंसिडेंटलोमा' कहा जाता है।" "कुछ मामलों में

अपने साक्षात्कार में दीपिका कक्कड़ ने बताया कि आक्रामक ट्यूमर होने के बावजूद उनके सीआरपी स्तर में मामूली वृद्धि हुई थी। इससे कैंसर का पता लगाने में सीआरपी की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।

डॉ. उपाध्याय बताते हैं, “सीआरपी, या सी-रिएक्टिव प्रोटीन, शरीर में सूजन की प्रतिक्रिया में यकृत द्वारा उत्पादित एक प्रोटीन है। इसका उपयोग आमतौर पर संक्रमण, सूजन संबंधी बीमारियों और ऊतक क्षति के सूचक के रूप में किया जाता है।”

हालांकि कुछ कैंसर रोगियों में सीआरपी का स्तर बढ़ सकता है, डॉ. उपाध्याय इस बात पर जोर देते हैं कि यह कैंसर-विशिष्ट परीक्षण नहीं है।

वे कहते हैं, "सीआरपी का उपयोग अकेले कैंसर का निदान करने या उसे खारिज करने के लिए नहीं किया जा सकता है। कुछ कैंसर महत्वपूर्ण सूजन पैदा करते हैं और सीआरपी के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि का कारण बनते हैं, जबकि अन्य में केवल मामूली वृद्धि हो सकती है, या उन्नत बीमारी के बावजूद सीआरपी का स्तर सामान्य भी हो सकता है।"

यह परिवर्तनशीलता इस परीक्षण की सबसे बड़ी सीमाओं में से एक है। डॉ. उपाध्याय कहते हैं, "सीआरपी सूजन का सूचक है, न कि स्वयं कैंसर का। कई गैर-कैंसर संबंधी स्थितियां, जैसे संक्रमण, ऑटोइम्यून रोग, मोटापा, हाल ही में हुई सर्जरी और यहां तक ​​कि मामूली बीमारियां भी सीआरपी के स्तर को बढ़ा सकती हैं।"

यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और/या हमारे द्वारा चर्चा किए गए विशेषज्ञों पर आधारित है। कोई भी नियमित प्रक्रिया शुरू करने से पहले हमेशा अपने स्वास्थ्य चिकित्सक से परामर्श लें।





शनिवार, 11 अप्रैल 2026

सैंपल कलेक्शन सेण्टर के सञ्चालन के सम्बन्ध में स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार को 5000 से अधिक मेडिकल लैब प्रोफेशनल्स ने दिया आपत्तियों सहित सुझाव: जे एफ एम एल टी इंडिया राष्ट्रीय संगठन का अभियान

सैंपल कलेक्शन सेण्टर चलाने का अधिकार सिर्फ मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट को ही मिलना चाहिए :कमलेश राठौर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, JFMLT India एवं महासचिव, MLTWA,MP 

सैंपल कलेक्शन सेण्टर का रजिस्ट्रेशन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट के नाम सेही किया जाना चाहिए अन्य प्रोफेशनल मान्य नहीं है :कमलेश राठौर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, JFMLT India एवं महासचिव, MLTWA,MP 

30 मार्च 2026 को  भारत के राष्ट्रीय संगठन ज्वाइंट फोरम मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट ऑफ़ इंडिया (जे एफ एम एल टी  इंडिया ) के तत्वावधान मे नेशनल लेवल का वेबिनार का आयोजन  किया गया जिसमें भारत  के सभी राज्यों से 300 से अधिक मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट, बेसिक लैब संचालक, टीचर्स ,प्रोफेसर शामिल हुए I


आपको अवगत कराया जाता है कि भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग के द्वारा  सैंपल कलेशन सेण्टर के सञ्चालन, रैजिस्ट्रशन एवं अन्य विषयों के सम्बन्ध में एक ड्राफ्ट प्रस्तुत किया गया जिसके तहत सभी सम्बंधित हितधारकों से आपत्ति एवं सुझाव मांगे गए थे

इस सम्बन्ध में नेशनल लेवल पर वेबिनार का आयोजन किया गयाजिसमें विभिन्न बिंदुओं पर विचार विमर्श और मंथन किया गया I

बेसिक लैब के सम्बन्ध में बात रखते हुए कहा कि बेसिक लैब का सञ्चालन एवं उसकी रिपोर्ट्स पर हस्ताक्षर के सबंध में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है जबकि 2015 - 16 के करिकुलम में हस्ताक्षर के सम्बन्ध में स्पस्ट किया गया था जबकि पुरे भारत देश में लगभग 70 % मरीजों कि जांचे बेसिक लेबोरेटरी के माध्यम से मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट के द्वारा कि जाती है विशेष तोर पर डिप्लोमा एवं डिग्रीधारी मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी का अहम् योगदान होता है 

श्री जयचंद्र जी तंवर ,राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष  ने हरियाणा राज्य में बेसिक लैब के रजिस्ट्रेशन के सम्बन्ध में पार्टिसिपेंट्स को अवगत कार्य कि हरियाणा भारत का पहला राज्य है जहाँ मेडिकल लैब  टेक्नोलॉजिस्ट के नाम से बेसिक लैब का रजिस्ट्रेशन किया जाता है

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री कमलेश राठौर ने कहा कि सैंपल कलेक्शन सेण्टर चलाने का अधिकार सिर्फ  मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट को ही मिलना चाहिए I

सैंपल कलेक्शन सेण्टर का रजिस्ट्रेशन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट का नाम से ही किया जाना चाहिए अन्य प्रोफेशनल मान्य नहीं है

प्रदेश अध्यक्ष विनोद वर्मा ने कहा कि कॉर्पोरेट लैब्स कलेशन सेण्टर का सञ्चालन सिर्फ और सिर्फ डिप्लोमा एवं डिग्री धारी मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट को ही प्रदान करे नॉन टेक्निकल को नहीं I

कॉर्पोरेट लैब्स मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट के द्वारा संचालित सैंपल कलेशन सेण्टर से सैंपल को पिक करेI साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सरकार इन मानगो को नहीं मानती है तो पुरे भारत में आंदोलन करने के मजबूर होंगे

इसके तहत पुरे भारत वर्ष से 5000  से अधिक मेडिकल लैब प्रोफ़ेस्सशनल्स ने आपत्ति एवं सुझाव मेल के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्रालय भारत सरकार को दिया गया

इस नेशनल लेवल वेबिनार का संचालन छत्तीसगढ़  से राष्ट्रीय महासचिव श्रीकांत तिवारी ने एवं राष्ट्रीय संयुक्त सचिव यदुनाथ मिश्रा ने  पुरे भारत के सभी प्रदेशो में एक अभियान चलाया ताकि मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट, स्टूडेंट्स, टीचर्स .बेसिक लैब संचालक  इस ड्राफ्ट के लिए  अपना सुझाव और आपत्ति दर्ज करा सके

आपत्तियों सहित सुझाव में इन प्रदेशों कि इकाईओं के मेडिकल लैब प्रोफेशनल्स ने भाग लिए हरियाणा,मध्य प्रदेश ,उत्तरप्रदेश,उत्तराखंड,राजस्थान,छत्तीसगढ़, दिल्ली, पंजाब ,महाराष्ट्र,झारखंड ,पश्चिम बंगाल,कर्नाटक,तेलंगाना ,गुजरात सहित अन्य प्रदेश


मंगलवार, 31 मार्च 2026

मेडिकल लेबोरेटरी क्षेत्र में उचित नियंत्रण,सैंपल कलेक्शन सेण्टर मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट कि ही प्राथमिकता: कर्नाटक स्वास्थ्य मंत्री ,दिनेश गुंडू राव

बेंगलुरुस्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा है कि मेडिकल लेबोरेटरी क्षेत्र में उचित नियंत्रण उपाय लागू किए जाएंगे। सैंपल कलेक्शन सेण्टर मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट कि ही प्राथमिकता है I

                 (कर्नाटक स्वास्थ्य मंत्री ,दिनेश गुंडू राव,मनोज यादव, रघुनाथ भोगले,कमलेश राठौर, रमेश कुमार,मनजिंदर मान 

स्वास्थ्य व्यवस्था में लैब टेक्नोलॉजिस्ट  की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। टेक्नोलॉजिस्ट उपचार में सटीकता के साथ कार्य करते हैं। सरकार लैब टेक्नोलॉजिस्ट की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस क्षेत्र में उचित नियामक उपाय आवश्यक हैं और सरकार इस दिशा में उचित कदम उठाएगी।

बेंगलुरुशहर के किमस अस्पताल परिसर में स्थित कुवेम्पु कलाक्षेत्र में कर्नाटक राज्य मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन एवं जॉइंट फोरम ऑफ़ मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट ( राष्ट्रीय संगठन)के सहयोग से  आयोजित 7वें राष्ट्रीय स्तर के चिकित्सा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकीविद् सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में लैब टेक्नोलॉजिस्टों  की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। टेक्नोलॉजिस्ट  उपचार में सटीकता के साथ काम कर रहे हैं। सरकार प्रयोगशाला तकनीशियनों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में उचित नियामक उपाय महत्वपूर्ण हैं और सरकार इस दिशा में उचित कार्रवाई करेगी

                कर्नाटक स्वास्थ्य मंत्री ,दिनेश गुंडू राव,डॉ संतोष कुमार यादव, कर्नाटक एसोसिएशन के अध्यक्ष वी. वेंकट स्वामी

निजी क्षेत्र में प्रयोगशाला खोलने के लिए उचित मानदंड होने चाहिए।  इस संबंध में निवारक उपाय किए जाएंगे। सरकार एसोसिएशन द्वारा किए गए अनुरोधों पर चर्चा करने और सभी संभावित मांगों को पूरा करने के लिए एक अलग बैठक बुलाएगी ,उन्होंने कहा कि वह अगले महीने एसोसिएशन के साथ एक अलग बैठक बुलाएंगे।

                                            

राज्य मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष वी. वेंकट स्वामी ने बताया कि इस राष्ट्रीय कांफ्रेंस कि अध्यक्षता जे.एफ.एम एल टी इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संतोष कुमार यादव द्वारा की गयी I इस अवसर पर डॉ संतोष ने  क्लीकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010 ( 2018 ) के बारे में जानकारी दी साथ ही भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सैंपल कलेक्शन सेण्टर के लिए  नियम बनाए जाने हेतु ड्राफ्ट बनाया गया जिसके सम्बन्ध में आपत्ति एवं सुझाव मांगे गए है जिसकी अंतिम तिथि 31 मार्च दिया गया है और सभी से आग्रह किया कि अधिक से अधिक संख्या में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट अपनी आपत्तियां एवं सुझाव मेल के माध्यम से भेजें I

 
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कमलेश राठौर

जे.एफ.एम एल टी इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कमलेश राठौर  ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सैंपल कलेक्शन सेण्टर खोलने एवं चलने का अधिकार सिर्फ मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट को ही होना चाहिए ब्लड सैंपल कलेक्शन से लेकर टेस्टिंग तक का कार्य लैब टेक्नोलॉजिस्ट द्वारा ही किया जाता है मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी  क्षेत्र में विशेषज्ञ के रूप में भूमिका अदा करते है

 

कर्नाटक राज्य मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष वी. वेंकट स्वामी ने कहा कि लैब टेक्नोलॉजिस्ट  के विकास को प्राथमिकता दी गई है। चिकित्सा क्षेत्र में हमारी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन में  अन्य राज्यों की एसोसिएशन के पदाधिकारी उपस्थित रहे जिसमें मध्य प्रदेश से महासचिव  कमलेश राठौर, महाराष्ट्र से रघुनाथ भोगले, पंजाब से अध्यक्ष रमेश कुमार, महासचिव मनजिंदर मान, हरियाणा से चेयरमैन मनोज यादव, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना के प्रतिनिधि की भी उपस्थति रही I

साथ ही अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने नए और नवोन्मेषी उपकरण प्रदर्शित किए, जो मरीजों को गुणवत्तापूर्ण रिपोर्ट प्रदान करेंगे।

राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बी.सी. भगवान भी अतिथि के रूप में उपस्थित रहे , इस कार्यक्रम के आयोजन समिति के रूप में  कर्नाटक एसोसिएशन के महासचिव सतीश कुमार, उपाध्यक्ष शिवशंकर पी., सचिव नारायणस्वामी, आयोजन सचिव बी.डी. सुरेश, शिवमूर्ति रेड्डी, कोषाध्यक्ष सुरेश के., यतिराज और अन्य  महत्वपूर्ण भूमिका में रहे

 











रविवार, 25 जनवरी 2026

हरियाणा के मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट एवं लैब संचालक हरियाणा बजट के लिए देंगे सुझाव अलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशन कॉउन्सिल गठन किया जाय: जे एफ एम एल टी इंडिया

 हरियाणा अलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशन कॉउन्सिल गठन किया जाय : जे एफ एम एल टी इंडिया

आज दिनांक  25 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय संगठन ज्वाइंट फोरम मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट ऑफ़ इंडिया (जे एफ एम एल टी  इंडिया ) एवं हरियाणा राज्य इकाई के तत्वावधान मे राज्य स्तर का ऑनलाइन  वेबिनार का आयोजन किया गया जिसमें हरियाणा  राज्य के विभिन जिलों करनाल,फरीदाबाद,पलवल,गुरुग्राम,नूह,सिरसा,कुरुक्षेत्र,अम्बाला,जींद,यमुनानगर,रेवाड़ी,झज्जरसहित अन्य जिले से  मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट, बेसिक लैब संचालक, टीचर्स ,प्रोफेसर शामिल हुए

हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी के द्वारा हरियाणा राज्य कि बेहतरी के लिए 2026-27 के लिए हरियाणा बजट के समबध में राज्य वासियो से सुझाव मांगे जा रहे है जिसके अंतर्गत उद्योग, शिक्षा , स्वस्थ्य, स्व; रोजगार एवं आत्म निर्भरता के साथ साथ रोजगार उत्पन्न करने के सम्बन्ध में इस क्षेत्र के वासियों से पोर्टल एवं मुख्यमंत्री जी के आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस सहयोगी के माध्यम से सुझाव मांगे जा रहे है जिसके लिए एक फ़ोन नंबर 7303350030  भी जारी किया गया है जो कि आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस  सहयोगी के रूप में  सभी सुझावों को इकट्ठा किया जायेगा

हरियाणा जे एफ एम एल टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संदीप देशवाल ने बताया कि इस सम्बन्ध में विभिन्न बिंदुओं पर विचार विमर्श और मंथन किया गया जिसमे तय किया गया कि हरियाणा राज्य में अलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशन कॉउन्सिल का गठन करने हेतु माननीय मुख्यमंत्री जी से आग्रह किया जायेगा साथ ही इसके लिए बजट बनाया जाय ताकि हरियाणा के मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट का रजिस्ट्रेशन हो सके एवं सभी लीगल प्रैक्टिस करते हुए स्व; रोजगार देते हुए हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग में महत्वपूर्ण योगदान दे सके साथ ही नए रोजगार का सृजन कर सकेI 

राष्ट्रिय अध्यक्ष डॉ संतोष कुमार ने बताया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य विभाग के द्वारा  नेशनल कमीशन फॉर अलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशन की स्थापना की गयी है जिसके अंतर्गत लगभग 52 तरिके के अलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशनस को शामिल किया गया है जिसमें मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी, फिजियोथेरेपी , ऑक्यूपेशनल थेरेपी ,ऑप्टोमेट्री ,डायलिसिस  थेरेपी  टेक्नोलॉजी एंड डायलिसिस थेरेपी, रेडिओलॉजी टेक्नोलॉजी , नुट्रिशन्स एंड डायटेटिक्स  सहित अन्य प्रोफेशनल्स के रेगुलेशन मॉनिटरिंग , एजुकेशन ,कर्रिएर प्रोग्रेशन पाथ के लिए विभिन्न प्रकार की कॉउन्सिल बनाया जाना है, इसके अंतर्गत ही हरियाणा राज्य में अलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशन कॉउन्सिल का गठन करना अनिवार्य है

श्री जयचंद्र जी तंवर ,राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष  ने कहा कि अगर हरियाणा राज्य में कॉउन्सिल का गठन कर दिया जाता है तो  बेसिक लैब के रजिस्ट्रेशन के सम्बन्ध में एवं बेसिक लैब कि रिपोर्ट्स पर हस्ताक्षर के सम्बन्ध में जल्द ही नियम बनाये जायँगे I

इस वेबिनार का संचालन राष्ट्रीय महासचिव श्रीकांत तिवारी छत्तीसगढ़ तथा राष्ट्रीय सह सचिव यदुनाथ मिश्रा नई दिल्ली  द्वारा किया गया साथ ही इनके द्वारा बताया गया कि राष्ट्रीय संगठन के तरफ पत्र के माध्यम से भी हरियाणा राज्य के मुख्यमंत्री जी को सुझाव दिया जायेगा  एवं आग्रह किया जायेगा I

 

बिना योग्य मेडिकल लेबोरेटरी प्रोफेशनल्स के संचालित लैबों पर हो कार्रवाई, मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि: जे एफ एम एल टी इंडिया

 बिना डिग्रीधारी अथवा डिप्लोमाधारी योग्य कार्मिकों के मेडिकल लेबोरेटरी का संचालन गलत; प्रदेशों के स्वास्थ्य विभाग करें सख्त कार्रवाई : JFMLT...